माँ कोई शब्द नही पूरी दुनिया कहलाती है
भगवान का रूप यह कहलाती है
भगवान ने सृष्टि रची लेकिन उसे सबका ख्याल रखने की चिंता सताती थी
इसीलिए उस परमेश्वर् ने माँ की रचना करी
सबका ख्याल रखने के चक्कर मे खुद का ख्याल करना भूल जाती है
खुद भूखी रहकर पूरे परिवार को खिलाती है
सारी तकलीफे सहकर सबको ये बचाती है
बच्चो के मामूली चोट लगने पर भी चिंता उसे सताती है
खुद की चादर बच्चो को औड़ाती है खुद सर्दी गर्मी सब सह जाती है
रात मे सौ बार उठ कर देखती है चादर सो औड़ाती है
खुद बीमार होकर भी सबकी देखभाल कर जाती है
माँ के बिन सारी दुनिया फीकी पड़ जाती है
जब भी कभी बाहर से आते है तो मा की सबसे पहले ढूँढा जाता है
माँ के हाथो का खाना स्वर्ग के पकवान पिछे छोड़ जाता है
अगर ना कर सको किसी मंदिर के दर्शन तो माँ के चरण स्पर्श कर शीश नवा लेना
मिलेगा पुण्य सबसे ज़्यादा क्यूकी वह ईश्वर है जीता जागता
जितना करो इसका बखान कम पड़ जाता है

Related Posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *