दण्डवत प्रणाम भारत भूमि को

शत शत बार दण्डवत प्रणाम ऐसी भारत भूमि को करते है

जहा छोटे बच्चे शेरो के साथ खेला करते है

जहा अपने पिता के वचन के खातिर वनवास जाया करते है

धर्म की स्थापना के लिए महाभारत रचा करते है

जहा पृथ्वीराज 16 बार युद्ध मे माफ कर दिया कर देते है

जहा सिर कटने के बाद भी लड़ा करते है

अन्याय के खिलाफ झुकने के बजाय राजपाट छोड़ जंगलों में घुमा करते है

जहा शिवाजी अपने धर्म की खातिर औरंगजेब से लडा करते है

जहा अपने बच्चे को पीठ पर बांध कर रानियां लड़ा करती है

जहा कुछ सिख मिलकर पूरी फ़ौज से लोहा लिया करते है

जहा आज़ाद लोग अपनी आजादी कायम रखा करते है

जहा भगत सिंह हँसते हँसते फांसी पर झुला करते है

जहा सुभाष पूरी फौज खड़ी किया करते है

जब खदड़ने की बात आती है तो कराची और पेशावर तक कब्जे में ले सकते है

जहा वीर सैनिक सरहद पर लड़ा करते है तो मौसम को भी मात दिया करते है

जहां किसान अन्नदाता के रूप में उजाड़ भूमि को भी उपवन कर जाते है

ये तो मुख्य बाते थी हम तो भारत के गुणगानो में बहुत से पुस्तकालय भरा करते है

ऐसे भारत भूमि को बारम्बार दंडवत प्रणाम करते है

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