कल तक जो भगतसिंह आज़ाद की गाथा गाया करते थे

जो वीर शहीदों के बलिदानों में आँसू बहाया करते है।

क्यों उनके भी रँग बदल जाया करते है

चुनावी ढोल पर क्यों वो भी नाच लिया करते है।।

जो श्री राम के आदर्शों पर चलने की बात कहा करते थे

जो भागवत गीता की कसमें सौ सौ बार खाया करते थे।

आज वही रावण के गुणगान गाया करते है

चुनावी रंग में खुद को ढाल लिया करते है।।

जिस भारत की चरणों की धूल माथे पर लगाया करते थे

भारत मॉ की रक्षा की बात सुनाया करते थे।

आज वो ही भारत माँ को छलनी किया करते है

अपने स्वार्थों के खातिर चुनावी माहौल बनाया करते है।।

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