किसान बन कर रह जाता हू

सुरज के जागने से पहले ही खेतो मे पहुच जाता हू
ठंडी सर्द सुबहो मे खेतो मे पानी पिलाता हू
सर्दी गर्मी या हो बरसात हर मौसम मे सह जाता हू
बिना जुत्ते चप्पल कांटो पर चल जाता हू
खुद भूखा रह कर अन्न मे उगाता हू
गाय भेस रखकर सबको दूध पिलाता हू
तपती दुपहरी मे पानी मे पिलाता हू
मेहनत मजदूरी करके रूखी सुखी ख़ाता हू
झोपड़ पट्टी मे रहता हू हर मौसम सह जाता हू
गोबर और मिट्टी से अपना घर सजाता हू
कभी सूखा कभी बाढ़ हर मार मे सह जाता हू
फिर भी अच्छी फसल उम्मीद लिए अगली बार फिर से उगाता हू
मे किसान हू किसान हू किसान बन कर रह जाता हू

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