कहने से क्या होता है

कहने के से क्या होता है झूठी दुनिया है फरेब करना इनकी आदत है
खुद के सच सुन नही सकते दुसरो के बघारते रहते है
अपनी झूठी इज्जत के खातिर दुसरो की जिंदगियां लील जाती है
चोरी ये करते है,डकैती ये करते है दूसरों को सताते है
पता नहीं क्या है ऐसा इनके पास फिर भी इज्जतदार कहलाते है
शायद कोई ऐसा व्यक्ति का साथ है जो हर झूठ सच बनाता है और सच झूठा साबित कर जाता है
कहने को तो लोग कोसते है भगवान को भी
लेकिन हिलता नही वह लेशमात्र
हैवानियत के ये नाना है झूठी शान के दादा
सच कहने वालों को अपनी ताकत ये दिखलाते है
गुलामी करना इनकी आदत है चापलूसी कर जाते है
कहते है अपने आप को बड़ा पर लगते है खजूर
कथनी करनी में दिन रात का फर्क कर जाते है
सुवर की सोच होते हुए इंसान क्यों कहलाते है

Related Posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *